08 May, 2020

सरहद से आया एक पत्र

जब मै छोटी थी तब अपनी मम्मी के साथ रेडियो सुनती थी। मेरे कई सारे पसंदीदा शो थे। कुछ पसंदिदा शो को मै मम्मी को फोन में रिकॉर्ड करती थी। आज जब सरहद पे जवान शहीद हो रहे है तब मुझे एक कविता याद आती है, जो मैंने ऐसे ही एक शो में रिकॉर्ड की थी।

कश्मीर में सरहद पर तैनात सैनिक अपने घर पर पत्र लिख रहा है, वो कश्मीर का हालात बताते हुए कहता है कि,

सोच रहा हू मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ
लंबे दिन या अपनी सुनी रात लिखूँ

आँखों  के आगे फैली है सीमाएं
गंध लिए बारूद पड़ी है पाँवो में
तैर रही है खामोश फिजा में कुछ चीखें
लगता है फिर खून बहा है गावों में
रह रह कर अंगार उगलती बंदूके
आग लगी है केसर की हर क्यारी मे
दूर दूर तक फसल उगी है नफरत की
हर सपना है मरने की तैयारी में
बर्बादी कि ये जो कुछ तस्वीरे है
किन शब्दों में ये बिगड़े हालात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

उसे याद है कि वो अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर इंद्रधनुष देखते थे,
आज जवानी इंद्रधनुष कैसे देखे
हर तरफ संकट के बादल छाए है
कुछ वहशी, कुछ मानवता के हत्यारे
छिप छिप कर हथियार उठाने आये है
फिसल रही है सदियों की रिश्तेदारी
खून बह रहा है आँगन चौबारों में
पुरखो का ये अपमान हो रहा सड़को पर
लोग मर रहे है खेतों और बाजारों में
सूनी सूनी आंखो में जो दिखाते है
कैसे तुमको वो ज़ख्मी जज्बात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ


सिर्फ इंसान ही नहीं; वन, पहाड़, जिल, शिकरे सभी उदास है,
चीड़ वनो में दहशत है सन्नाटा है
आज चिनारों की रंगत मुरझाई है
जिल उदासी के सागर में डूबी है
आज शिकारों में खामोशी छायी है
झेलम के तट पर जाने क्या क्या बेच रहे
जुलस गई अपनी फूलों की शहजादी
जिसे जमीं का स्वर्ग यह सब कहते थे
उस वादी कि यह कैसी है बर्बादी
कश्मीर चुपचाप सभी कुछ देख रहा
कैसे उसके सीने के हालात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

गोलीबारी खत्म होने के बाद उसे ये घर से आया हुआ पत्र मिला है; वो बताता है कि,
और अभी अभी कुछ शांत पड़ी गोलीबारी 
ऐसे में ये पत्र तुम्हारा आया है
कितनी धड़कने कितने आंसू साथ लिए
कोमल संबंधों की खुश्बू लाया है
माँ की झप्पी बाबा के आशीष कई
इसमें अपने बच्चों की किलकारी है
और वे घड़ियां जो राह देखते बीत गई
इसमें उनकी मजबूरी लाचारी है
आँसू की बातें है आँसू पढ़ते है
आंखो को क्या आँसू की बरसात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए कहता है कि मुझे आज भी वो दिन याद है जब मेरे जाने पर तुम्हारी आंखो मै आसुं आ गए थे, मुझे साथ बिताए हुए हर एक पल याद है,
और यादों में आँचल अब भी लहरा जाता
यादों में वो काजल अब भी बहता है
यादों में आकर उभरते है कितने
घर का हर कौना यादों में बहता है
शाम ढले जब सो जाती है परछाई
बालों को उंगली अब भी छू जाती है
काश चली आती वो प्यार की रातें
यादों में वो याद पुरानी आती है
लिख दूँ तुम्हें रेशम से कोमल घडियाँ
उड़ती खुश्बू या यह की जड़ते पात लिखूं
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

उसे पता है की वो घर पर ज्यादा समय नहीं बिता पा रहा है, बहुत से काम करने बाकी है, माँ बाप का कर्ज चुकाना बाकी है,
वापस आ कर काम बहुत से करने है
रिश्तों का भी फ़र्ज़ चुकाना बाकी है
पर उनसे भी बढ़कर अपने जीवन में
इस माटी का कर्ज चुकाना बाकी है
और सोचो, सब अपनी खुशियों की सोचेंगे
तो भारत की पीड़ा कौन मिटाएगा
और सब बैठेंगे घर की चार दीवारों में
तो सरहद पर मस्तक कौन चढ़ाएगा
निकल पड़ी है आज वतन के माथे पर
ऐसे में क्या सपनों की बरसात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

सबकी तो एक माँ ही होती है पर सैनिक की दो माँ है; एक अपनी माँ और दूसरी धरती माँ,
अपनी माँ के बेटे तो सब होते है
हम धरती के बेटे है तैनात यहां
और अपने हक कि बातें तो सब करते है
भारत माता की होती है बात यहां
कुछ तो है जो हमें खींच कर लाई है
हम स्वेच्छा से प्राण लूटने आए है
साथ हमारे यह नन्हा सा जीवन है
हँसते हँसते भेंट चढ़ाने आए है
और शपथ उठाई है कर्तव्य निभाने की
इस माटी को प्राणों की सौगात लिखूँ
सोच रहा हूं मीत तुम्हें क्या बात लिखूँ

सैनिक की विडम्बना बताने वाली और उसको नायक बनाने वाली ये कविता जिसने भी लिखी है बड़ी ही तारीफ के काबिल है।

आज, जब पूरी दुनिया covid-19 से जूझ रही है, तब भारत को भी आपकी जरूरत है। हमें सरहद पर जा कर दुश्मनों से लड़ना तो नहीं है पर इस समय में आप घर के अंदर रह कर अपने देश की सेवा कर सकते है। सामाजिक दूरी(social distancing) का पालन करे, बाहर निकले तब भी दो गज की दूरी बनाई रखे,

मास्क पहन कर रखे, बार बार हाथ साबुन से धोते रहे।
ऐसी वैश्विक महामारी में भी अपना कर्तव्य सबसे पहले रख कर, देश को दुश्मनों से बचाने के लिए, अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों और उनके परिवार को हमारा सलाम।
जय हिंद।

4 comments:

Unknown said...

👌👌👌👌👏👏👏superb bina😘

Unknown said...

Awesome...
Superb Poem and wish you write your thought more and more.
God Bless You.

Media Bharti News said...

बहुत बढ़िया

Jaydev joshi said...

Fabulous...
Jay hind
Jay bharat

what does depression feels like in professional life?

Hello! I am doing my master's and working as a freelancer part-time. I often feel depressed. one day one of my friends asked what does i...