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photo source : filmibeat |
"कभी कभी कुछ बातें हमारे यादों के कमरे की इतनी खिड़कियां खोल देती है कि हम दंग रह जाते है। बहुत खूबसूरत होती है ये यादों कि दुनिया, हमारे बीते हुए कल के छोटे छोटे टुकड़े हमारी यादों में हमेशा रहते है। यादें मिठाई के डिब्बे की तरह होती है, एक बार खुला तो सिर्फ एक टुकड़ा नहीं खा पाओगे" ये जवानी है दीवानी का ये डायलॉग हमारे विषय में भी यथार्थ होता है
अभी अभी दिवाली का त्योहार आने वाला है। वैसे तो दिवाली का त्योहार राम भगवान के अयोध्या वापिस लौटने का त्योहार माना जाता है और उसी खुशी में सभी अपने घरों के आसपास दीप जलाते है। हिन्दू धर्म में दिवाली का अनूठा स्थान है और यह त्योहार सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। धनतेरस, रूपचौदस, दिवाली, नया साल और भाईदूज जैसे 5 दिन चलने वाला ये त्योहार अपने साथ कई सारी खुशियां ले कर अता है। लोग दिवाली कि तैयारियों की शुरुआत काफी दिन पहले से करना शुरू कर देते है और इन सब की शुरुआत होती है घर की सफाई से।
घर की सफाई वैसे तो बहुत ही बोरिंग काम है। अपना सुख, शांति और नेटफलिक्स छोड़ कर घर का काम करना किसीको भी अच्छा नहीं लगता। कोई कोई तो खुद की बीमारी का बहाना बनाते है तो कोई ओवरटाइम का। कोई परीक्षा का बहाना बनाते है तो कोई ' आज थक गया, कल से पक्का शुरू करेंगे ' का। लेकिन मम्मी/ बीवी के सामने किसिकी एक नहीं चलती, अरे वहां तो डस्ट एलर्जी भी काम नहीं आती और शुरू हो जाती है घर की सफाई। घर के सभी लोग डाकू बन कर साफ सफाई में जुट जाते है। पुरानी सारी चीज़े निकाल कर, साफ कर के वापिस जैसे थे वैसे रख देते है और इन बीच हम यादों की गलियों में घूम आते है। संदूक तो जैसे हमारा बचपन संभाले हुए है; हमारे पुराने खिलौने, पुरानी चित्रपोथी ( drawing book), छोटे कपडे, छोटे बुट, कहानियों की किताबें, पुराना स्कूल बैग, टूटा हुआ वाज़, सूखे हुए फूल, ना भेजा गया पत्र, मेडल्स, एल्बम, पुरानी किताबें और उन पर लिखी शायरियां। ये सभी चीज़े चाहे कितनी भी पुरानी, टूटी हुई क्यों ना हो पर हमारे दिल के सब से करीब रहती है। इस में बच्चे का ' मै कभी इतना छोटा था?' का आश्चर्य है तो एक मा के ममत्व की यादे। ये चीज़े एक युगल का अपने बच्चे को ले कर प्यार है और एल्बम में अभी तक कि सफर का सफरनामा। सच में, यादें मिठाई के डिब्बे की तरह ही है, एक बार खुला तो सिर्फ एक टुकड़ा नहीं खा पाएंगे। पुस्तकों में लिखी हुई शायरियां, पत्र और सूखे हुए फूल, यादों का वो टाइम मशीन है जो बीते हुए पलो को वापिस ला सकते है। आप उस पल में हस सकते हो, रो सकते हो, या फिर उसकी याद में सिर्फ मुस्कुरा कर वापिस इस पल में लौट सकते हो। ये बीते हुए पल ज़िंदगी के वो पल है जो आप वापिस जीना तो चाहेंगे पर कभी वापिस नहीं ला सकते मगर ये कुछ चीज़े है जो उन पलो को अपने में संभाले बैठी है।
इन सब पलो की खूबसूरती ये है कि आप ज्यादा देर तक उसमे गोते नहीं लगा पाते क्युकी आपके आसपास फैली हुई धूल है और काम ख़तम करने का बोझ आपको वापिस ला ही देता है। घर को वापिस पहले जैसा बनाना होता है, दूसरे लफ्जो में यूं कहिए कि और भी ज्यादा संवारना होता है। कोई घरों में कलर करवाते है तो कोई फर्नीचर बनवाते है तो कोई अपना इंटीरियर बदलते है। इन सब के बीच कबाड़ीवाले भैया का बिजनेस आसमान छू रहा होता है और कोई कोई तो वहां से भी कुछ सामान खरीदकर अपने घर में ' एंटीक पीस ' की तरह सजा देते है। ये बात मत भूलना की आप नई चीज़े नहीं बसा रहे, परन्तु आप अपने जीवन में नई यादें बना रहे हो।
साफ - सफाई का काम ख़तम करने के बाद ऐसा लगता है जैसे घर में नई चेतना का संचार हुआ हो। नए घर में मनाई जाने वाली दिवाली उससे भी ज्यादा रोमांचक हो जाती है। साफ सफाई तो हमारा सिर्फ पहला चरण था, मूल सारे काम तो अब से शुरू होंगे। धनतेरस की पूजा कि तैयारी, दिवाली के लिए नए कपडे, बच्चो के लिए पटाख़े, आंगन सजाने के लिए रंगोली के रंगों की खरीददारी, साल को वेलकम करने के लिए न्यू ईयर पार्टी, नए साल का मुंह मीठा करवाने के लिए मिठाईयां, भाईदूज के दिन बहन के घर जाने की उत्सुकता और ये सब खत्म होते ही वापिस काम पे लगने की नीरसता। बच्चो के हसी की किलकारी, पटाख़े के आवाज, रंगोली बनाते हुए छलकतीे नज़ाकत, मिठाई में डलती हुई इश्क की चाशनी, हर घर के पास उजाला किए हुए नन्हा सा दीपक या तो ज़गमगाती हुई चाईनीज लाइट, छुट्टियां मनाने के लिए घर आते बच्चे; दिवाली सचमुच में लोगों को नजदीक ला देती है।
Bins's Favourite
थम के रह जाती है जिन्दगी तब
जब जम के बरसती हैं पुरानी यादे
जब जम के बरसती हैं पुरानी यादे

1 comment:
What a beautiful composition of words!!!... Happy Diwali to You in advance 😊
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